News By Ajeet Kumar
Updated :- 16 May 2026 At 6:50 AM
Nepal News:- भारत के इस फैसले ने नेपाल की फिक्र बढ़ा दी है। खासतौर से त्योहारों के मौसम में नेपाल में चीनी की कमी हो सकती है। दशैन, तिहार और छठ के आसपास दबाव बढ़ सकता है, जब चीनी की मांग ज्यादा होती है। एक्सपर्ट ने इस मुद्दे पर नेपाल की बालेन शाह सरकार को चेताया है और खाद्य सुरक्षा के लिए कदम उठाने की मांग की है।
नेपाल में आने वाले महीनों में चीनी की कमी हो सकती है।
काठमांडू पोस्ट के मुताबिक, भारत ने नेपाल को होने वाले निर्यात को रोका है। इससे नेपाली बाजारों में उथलपुथल की संभावना है। यह इसलिए भी है क्योंकि ऐसी आशंका है कि अल नीनो की स्थितियों के कारण आने वाले समय में सूखा पड़ सकता है। इससे कृषि उत्पादन को नुकसान होगा और अगले सीजन की पैदावार कम हो जाएगी।
भारत के चीनी निर्यात पर रोक लगाने से नेपाल में तुरंत कोई कमी आने की संभावना नहीं है लेकिन त्योहारों के मौसम में दबाव काफी बढ़ सकता है। इससे चीनी के दाम बढ़ने की संभावना है क्योंकि त्योहारों के दौरान नेपाल के भीतर चीनी की मांग तेजी से बढ़ती है।
भारत एक बड़ा चीनी निर्यातक
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी निर्यातक है। नेपाली अधिकारियों का कहना है कि इससे पता चलता है कि भारत के व्यापार प्रतिबंधों के सामने हमारा देश कितना कमजोर है। नेपाली उद्योग और वाणिज्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव नेत्र प्रसाद सुबेदी ने कहा कि हम चाय निर्यात पर भारत के नए नियमों पर चर्चा कर रहे थे कि चीनी पर प्रतिबंध लग गया है।
नेपाल के प्रधानमंत्री शाह
सुबेदी ने कहा कि हम संबंधित हितधारकों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे और नेपाल की आवश्यकताओं को स्पष्ट करेंगे। चावल के विपरीत जरूरत पड़ने पर चीनी के वैकल्पिक बाजारों को ढूंढ़ा जा सकता है। अगर कोई और विकल्प नहीं मिलता है तो हम सरकार-से-सरकार व्यवस्था के जरिए भारत से संपर्क कर सकते हैं।
नेपाल पर सीधा असरव्यापारियों और विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की व्यापार नीतियों का नेपाल पर सीधा असर पड़ रहा है। भले ही नेपाल भारत के कुल निर्यात का एक छोटा सा हिस्सा ही आयात करता हो। इससे पहले सितंबर 2023 में भारत ने सात सालों में पहली बार नेपाल को चीनी का निर्यात रोक दिया था। इसके बाद नेपाल ने चीनी की मांग को पूरा करने के लिए 60,000 टन चीनी आयात की।
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व्यापार विशेषज्ञ रवि शंकर सैंजू ने कहा कि भारत की निर्यात पाबंदी नेपाल में खाने-पीने की चीजों पर असर डालती है, क्योंकि वह इसके लिए भारत पर बहुत निर्भर है। नेपाल को दूसरे देशों से खाना और सामान मंगाना महंगा पड़ता है क्योंकि लॉजिस्टिक्स की लागत ज्यादा होती है। इससे नेपाल के विदेशी मुद्रा भंडार पर भी दबाव पड़ता है। ऐसे में नेपाल को खाद्य सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देना होगा।