News By Ajeet Kumar
Updated :- 16 May 2026 At 8:46 PM
- वाराणसी-कोलकाता ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बिहार के 9 जिलों को यूपी, झारखंड और बंगाल से जोड़ेगा, जिससे यात्रा का समय काफी कम है।
- इस एक्सप्रेसवे के बन जाने से बिहार के कई जिलों को मिलेगा लाभ
- वाराणसी और कोलकाता की दूरी मात्रा 5 से 6 घंटे रह जाएंगे
बिहार को जल्द ही एक और बड़ी सड़क सौगात मिलने जा रही है। वाराणसी से कोलकाता तक बन रहे 610 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा फायदा बिहार को मिलने वाला है। यह हाईस्पीड कॉरिडोर राज्य के 9 अहम जिलों को सीधे यूपी, झारखंड और बंगाल से जोड़ेगा।
इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद दक्षिण बिहार की कनेक्टिविटी पूरी तरह बदल जाएगी। कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद और गया जैसे जिलों से कोलकाता और वाराणसी का सफर बेहद आसान हो जाएगा।
बिहार के जिलों में खुलेगा रोजगार और कारोबार का रास्ता
करीब 35 हजार करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह एक्सप्रेसवे सिर्फ सड़क परियोजना नहीं, बल्कि बिहार के लिए बड़ा आर्थिक कॉरिडोर माना जा रहा है। एक्सप्रेसवे जहां-जहां से गुजरेगा, वहां इंडस्ट्री, वेयरहाउस, होटल और ट्रांसपोर्ट कारोबार तेजी से बढ़ने की उम्मीद है
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे दक्षिण बिहार के कई जिलों में निवेश बढ़ेगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। खासकर गया और औरंगाबाद जैसे इलाके लॉजिस्टिक हब के रूप में विकसित हो सकते हैं।
12-14 घंटे का सफर अब सिर्फ 6 घंटे में
वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे बनने के बाद यूपी से बंगाल तक की दूरी आधे समय में पूरी हो सकेगी। अभी वाराणसी से कोलकाता पहुंचने में 12 से 14 घंटे लगते हैं, लेकिन एक्सप्रेसवे तैयार होने के बाद यह सफर करीब 6 घंटे में पूरा होगा। इससे बिहार के व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों और यात्रियों को सीधा फायदा मिलेगा। माल ढुलाई तेज होगी और परिवहन खर्च भी कम होगा।
बिहार से होकर झारखंड-बंगाल तक जाएगा कॉरिडोर
यह एक्सप्रेसवे यूपी के वाराणसी रिंग रोड के पास बरहौली गांव से शुरू होगा। इसके बाद यह बिहार के कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद और गया जिलों से होकर झारखंड में प्रवेश करेगा।झारखंड में चतरा, हजारीबाग, रामगढ़, बोकारो और पीटरबार इलाके इससे जुड़ेंगे। इसके बाद यह पश्चिम बंगाल के पुरुलिया, बांकुड़ा, हुगली और हावड़ा होते हुए कोलकाता पहुंचेगा।रुके हुए काम को मिली बड़ी मंजूरीइस परियोजना के झारखंड और पश्चिम बंगाल वाले हिस्से में पर्यावरण मंजूरी की वजह से काम अटका हुआ था। अब केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य में तेजी आने की उम्मीद है।