100 साल पुराने चुनौतीपूर्ण रेलखंड पर बीओबीआर रेक दौड़ाने की तैयारी पूरी; पूर्व मध्य रेलवे की बड़ी उपलब्‍ध‍ि

News By Ajeet Kumar

Updated: 15 May 2026 12:04 AM

पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक ने गुरपा-गझंडी घाट सेक्शन में बीओबीआर रेक के सफल परीक्षण का निरीक्षण किया। यह पहल एनटीपीसी संयंत्रों तक कोयला परिवहन में बचत होगी।

महाप्रबंधक ने गुरपा-गझंडी घाट पर बीओबीआर रेक का निरीक्षण किया। सुरंगों के रीडिजाइन से बीओबीआर परिचालन का मार्ग प्रशस्त हुआ। कोयला परिवहन में तेजी, वैगन टर्नअराउंड में सुधार होगा।

पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह ने गुरुवार को प्रधान मुख्य परिचालन प्रबंधक इंदू रानी दुबे के साथ गुरपा-गझंडी घाट सेक्शन में बीओबीआर रेक का फुटप्लेट निरीक्षण किया। यह निरीक्षण ग्रैंड काॅर्ड (जीसी) लाइन के चुनौतीपूर्ण रेलखंड पर किया गया, जिसकी शुरुआत वर्ष 1906-07 में लार्ड मिंटो के समय हुई थी।धनबाद मंडल के गुरपा-गझंडी घाट सेक्शन में 1:80 का रूलिंग ग्रेडिएंट, तीन सुरंगें, छोटी पहाड़ियां एवं ऊंचे टीले होने के कारण इसे अत्यंत चुनौतीपूर्ण माना जाता है।सुरंगों की ऊंचाई कम होने से थी समस्‍या आजादी से पूर्व निर्मित इस रेलखंड में सुरंगों की ऊंचाई सीमित होने एवं अन्य अवरोधों के कारण अब तक बीओबीआर वैगनों का परिचालन नहीं हो पाता था।

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पूर्व मध्य रेलवे ने आइआइटी-आइएसएम धनबाद के सहयोग से टनलों के रीडिजाइन एवं डाइमेंशन बढ़ाने का कार्य पूरा किया। इसके बाद डाउन लाइन में खाली बीओबीआर रेक का सफल ट्रायल संभव हो सका है। कोयला परिवहन में समय की हाेगी बचतरेल अधिकारियों के अनुसार इस पहल से गुरपा-गझंडी घाट सेक्शन में बीओबीआर रेक परिचालन का रास्ता साफ होगा। इससे बाढ़, बरौनी एवं सलाकाटी स्थित एनटीपीसी प्लांटों के लिए कोयला परिवहन में समय की बचत होगी तथा वैगन टर्नअराउंड में उल्लेखनीय सुधार आएगा।

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